वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Wednesday, May 18, 2005

जो देखा भूलने से पहले

पाँच मिनट

पाँच मिनट हैं आधी रात होने में, और फिर और एक नया दिन. कल शाम नेहरू केंद्र लंदन में अशोक वाजपेयी का कविता पाठ सुनने गया... पर उस पर फिर कभी शायद.
बस अभी एक ब्लोग पढ़ा http://riverbendblog.blogspot.com/ और सोचता हूँ... क्या होने वाला है... दुनिया में