वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Sunday, May 22, 2005

रविवार

सुबह से बारिश हो रही है बीच में रुक गई थी पर अब उसकी झड़ी लगी है, सफेद रोशनी में घनी हरियाली
कुछ अजीब सी लग रही है जैसे वह कृत्रिम हो पर उसकी पुष्टि कैसे हो कोई तथ्य भी नहीं ..
20 तारीख को सालाना बाथ संगीत मेला शुरु हो गया, विक्टोरिया पार्क में हर साल की तरह भीड़ थी ,कुछ कम ,पर थी.
लोग अपने साथ छोटे शामियाने भी ले आए, दरियाँ बिछा कर खाने पीने में लगे थे पार्क के भीतर पुलिस और एम्बुलेंस की गाड़ियाँ भी एक ओर तैयार खड़ी थीं क्योंकि
बड़ी तदाद में नौजवान थे और पीने के बाद लड़ाई झगड़ा और मनमर्जी की हरकतें इधर कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं, टोनी ब्लेयर को आठ साल बाद अब जाकर होश आया है कि अंग्रेजी समाज की हालत क्या हो गई है और बिगड़ती जा रही है..
बहरहाल तो दस बजे तक बाथ फिलॉमॉनिक शास्त्रीय संगीत सुनाता रहा और फिर जिसका सबको इंतजार था.. दस मिनट की आतिशबाजी, धमाकों के साथ अँधियारा गीला आकाश रंग बिरंगे जलते फुहारों से चमक उठता, कभी तालियाँ कभी सामूहिक किलकारी भरा आश्चर्य.. और फिर एक वापसी अंधियारे कोलाहल की, वापसी में अँधरे में अपना रास्ता टटोलती लड़खड़ाती आवाजें टूटती अधूरे शब्दों में .. मोबाइल फोन पर बात करता कोई कहता "...हाँ यहाँ बहुत सारे लोग हैं.."
पुलिस की वैन में दो पुलिस वाले एक नौजवान को धकलते, आज उसकी रात थाने में ही बीतेगी, मैंने सोचा और यह भी देखा कई और भी वहाँ आसपास मँडरा रहे थे जैसे उनका भी मन हो पुलिस के साथ दो बात करने का ..

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