वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Tuesday, July 19, 2005

जगह

शाम को मैं बादलों को देख रहा था और उस पल मैं दिल्ली पहुँच गया
डामर की सड़क जिस पर बारिश की बौछार के बाद निंबौरियाँ बिखरी थी और नंगे पाँव.


20.7.05 © मोहन राणा