वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Thursday, July 28, 2005

समुंदर के किनारे


ज्वार और भाटा दोनों एक साथ जैसे - लगातार टकराती लहरें- और समुंदर का टूटता सीत्कार.

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