वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Friday, August 19, 2005

दिन


कल को जिया
कि जियूँ एक और कल को,
सिमटते सारे दिन जैसे अपने आप में.

19.8.05