वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Sunday, September 04, 2005

मचान

आकाश नजदीक था
सीढ़ियाँ अंतहीन
और ऊँचाई बहुत पास
कि छू कर बदल दूँ रंग आकाश का
कुछ और उठा दूँ पहाड़ों को
रोक दूँ समय को लाल टाइलों की छतों पर,
पर डर से देखता नहीं नीचे
बढ़ती गहराई को



4/9/05 © mohan rana
Guinigi Tower Lucca