वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Thursday, November 03, 2005

परिधि

क्या अंत का भी कोई आंरभ होता है
जो नहीं होता है कभी उसका भी कोई अंत होता है,
भ्रम को सच मानते