वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Saturday, April 01, 2006

भौंरा


खिड़की खोलते ही एक ठंडी हवा का एक झोंका कमरे में घुस जाता है लगता है धूप निकलेगी यह सोचकर कुर्सी पर बैठा ही था कि भिनभिनाहट सुनाई दी,
पलट कर देखा एक मोटा सा भौंरा खिड़की के पास भिनभिना रहा था जैसे झांक कर हालचाल पूछ रहा हो .... फिर बिना कुछ सुने वह आगे खहीं बढ़ गया,

क्या गर्मियाँ आ गईं? वसंत बिना बताए आ कर चला भी गया!