वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Friday, June 09, 2006

नाम और अन्य कविताएँ

इधर एक इंटरनेट पत्रिका museindia में http://www.museindia.com/cissue7.asp कुछ कविताओँ http://www.museindia.com/showcon.asp?id=236 के अनुवाद छपे हैं.

..इस साल जनवरी में जैसलमेर से दिल्ली लौटते हुए हम जोधपुर में दो दिन रूक गए .. शहर की गलियों में भटकते हम मसाला बाजार में पहुँच गए