वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Friday, November 06, 2009

जहाँ बादल सुनाते हैं संदेश


आसीनानाम् सुरभितशिलम् नाभिगन्धैर्मृगाणाम्
तस्या एव प्रभवमचलम् प्राप्ते गौरम् तुषारैः।
वक्ष्यस्य ध्वश्रमदिनयने तस्य श्रृंगे निषण्ण : शोभाम्
शुभ्रत्रिनयन वृशोत्खात्पंकोपमेयाम्।।
_ कालिदास, मेघदूत





फोटो - मोहन राणा