वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Sunday, January 09, 2011

कविता वृत्त

जहाँ तक कविता की बात है मेरा मत है कि..

तितली तो नहीं मैं किसी को दे सकता हूँ, उसके पंखों की जादुई उड़ान का आभास ही शब्दों से देता हूँ. ताकि पढ़ने वाले के भीतर कोये में सोई तितली उस तरंग को महसूस कर जाग उठे.