जहाँ तक कविता की बात है मेरा मत है कि..
तितली तो नहीं मैं किसी को दे सकता हूँ, उसके पंखों की जादुई उड़ान का आभास ही शब्दों से देता हूँ. ताकि पढ़ने वाले के भीतर कोये में सोई तितली उस तरंग को महसूस कर जाग उठे.
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