वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Saturday, October 29, 2011

शरद Autumn
















टूटता है समय अपनी सूख गई स्नायुओं से
blown away with gusts of autumn, clinging to the edges, surfaces and sides of walls, roads, fences and bare branches and this moment

No comments: