वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Thursday, February 16, 2012
















भरोसा होता है तुम्हारी आँखो में अपनी पहचान देख हर सुबह
दाना चुगती रॉबिन रुकती सावधान
खिड़की पर फिर वही आदमी कुछ देखता!

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