वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Monday, July 09, 2012

खाकरोबी



गीले बगीचे का खाकरोब
धूल को ढूँढता हूँ  बांझ हरियाली में
पतझर को समेटते
मेरे बोरे में बंद में पिछले वसंत के टूटे सपने...

© मोहन राणा
9.7.12

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