वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Sunday, January 25, 2015

अपनी कही बात /In Your Own Words

अपनी कही बात


उन्होंने कहा न जाओ दुनिया के छोर तक
डर जाओगे अपनी लम्बी परछाईं को देख,
उस पार पंखों वाले अजगरों की दुनिया है
उनकी उगलती आग से उजली धरती
जहाँ न रात है न दिन अगर तुम पहुँचे तो
राह देखते पत्थर में बदल जाओगे,
जैसे किसी और से सुनी हो यह
अपनी कही बात
जीवन में रिहर्सल की संभावना होती तो
लिख रखे हैं पटकथा में कुछ परिवर्तन,
टाल नहीं सकता अपनी कही बात
लौटना
जाना
तुमसे प्रेम करना,
न लिखे कई दिनों तक,
पर मैं भला न था
बुरे दिनों को जीते मैं बुरा होता रहा
मैं समय की तरह अगोचर हो गया
घड़ी में घूमता लगातार
अपनी ही कही किसी बात पे सनकाया सा


(इस छोर पर / वाणी प्रकाशन, वर्ष:2003)


In Your Own Words








They said: Don't go to the end of the Earth
because your lengthening shadow will frighten you.
There it is the world of winged pythons;
the earth there is ablaze with the fire they spit.
If you arrive where it is neither day nor night
you'll be turned into stone while you are waiting.
As if I had heard these words of mine
from somebody else.
If I'd had a full life rehearsal
I'd have made some changes to the text;
but I can't get away from my own words:
returning;
going away;
loving you.
But I wasn't good enough,
I couldn't write for days.
Living in evil times, I turned evil;
not seeing time passing,
I became imperceptible
as if trapped in clockwork
driven crazy by my own words.


The  translation of this poem was made by Lucy Rosenstein
and  Bernard O'Donoghue

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