कविता अनुवाद और विचार
यूँ तो शब्दकोश निरंतर नये शब्दों अर्थों से भरता जाता है पर ख़ाली भी धीरे-धीरे होता जाता है। दैनंदिन में समय का अकेलापन भूगोल की उदासी
और भविष्य की ढलान पर टिके क्षितिज की बेचैन दृष्टि में, एक दृश्य अपना पन्ना बदलता है । मैं फिर उसके सामने हूँ एक कोरे आइने को ताकता....
(हैरिस द्वीप, स्कॉटलैंड - लाल टिन की छत वाला , पुराना पोस्ट ऑफिस)
कुछ समय पूर्व मेरी एक कविता " कालचक्र"
'रागदिल्ली' की वेबसाइट में प्रकाशित हुई थी। (https://raagdelhi.com/news/hindi-poetry-by-pravasi-bhartiya---mohan-rana-new-poems)
उसी कविता का अनुवाद/पुर्नसर्जना रूप और कविता और अनुवाद पर एक संक्षिप्त चर्चा से निकली एक विचारणीय टिप्पणी अरूप जी ने
अपनी वेब साइट पर प्रकाशित की है।
https://arupkchatterjee.com/2026/02/04/the-speechless-revolution/




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