वह रुका पल कोई घर है कहीं

वह रुका पल कोई घर है कहीं

Monday, May 08, 2017

रोशनी को जमा करते

कटोरा जब भर जाएगा
तप कर


Thursday, May 04, 2017

बजरंगी पट्टा

रंग एक है पर  विचार अलग
भारत में साम्यवादी लाल बत्ती की बैटरी अमेरिकन है
फिर अफवाह सुनी थी कि ओबामा भी चालीसा गुटका जेब में रखते थे
और लगता है श्रीमती मे भी रखने लगेंगी  
गर  मैक्रॉन ने सोमवार को पेरिस में हुँकार दी
और अगले सप्ताह से  पाउंड बाजार में लुढ़कने लगा तो
बारह कोने हैंं पाउंड के नए सिक्के में
पर परिस्थितियाँ केवल दो दशाएँ बताती हैं
अच्छी या बुरी
यूँ एक नजर में दूर सिक्का गोल ही दिखता है
हथेली पर एक पल को इस अचरज को थोड़ा वक्त लगेगा
पुराना पड़ने में  जैसा जीवन में होता आया है
पुराने को ही भूलने में

हनुमान त्रियुगी त्रिकाल दृष्टि ..an extraterrestrial
भाषा के भूगोल में अलख
जो याद बस इतना ही अब तलक

फिर भी  सवाल मुझ से पूछा ही जाता है
दोनों का रंग लाल है

©  2017

Tuesday, April 25, 2017

दैनिक जागरण में समीक्षा

कविता संग्रह  "शेष अनेक" की  दैनिक जागरण में  स्मिता   की लिखी समीक्षा।























शेष अनेक (कविता संग्रह)

प्रकाशक -

कॉपर कॉइन पब्लिशिंग 

Sunday, April 09, 2017

Language Barriers, Language Futures

On 14th March 2017, I was in a panel discussion at 'The EnglishPen Literary Salon' in London Book Fair 2017.

On Stage with Somrita Ganguly, Bidisha Mamata,Mohan Rana, Arunava Sinha, and
Jonathan Morley.




Saturday, December 31, 2016

है गोल दुनिया गोल

बादल वाले जहाज़ दो तीन दिन से गायब हैं
नीलाकाश फिर भी आंशकित करता जैसे
यह कोई सपना हो!
हवा संतुलित और पंछी आश्वस्त बल खाते हुए
कि धरती और आकाश अपनी जगह नहीं बदलेंगे।

बड़ी तितलियाँ भी मंडराती दिखाई दीं कुछ दिन पहले
खिड़कियों में बंद घर संसार के बाहर,
वसंत घट रहा है बिना कोंपलों के अभी
कई दिनों बाद यकायक चमकती धूप का भरम भी यह हो सकता है
और कुछ दिन में फिर  यथा वात मौसम, 
पर अभी हम सुखन
अपने दो पैरों पर घूमते

गोल दुनिया गोल गोल
हर दिशा में बाकी तब
इस गोल में सब कुछ समाए
ऊँचे नीचे सब आकार प्रकार
इसमें लौटते सारे रास्ते अपने प्रस्थान पर

बरख बरख स्मृति बटोरते यहाँ
रखते एक गठरी,  सौंपते एक दूसरे को
सहेजा एक सपना
यह पुराना नहीं होगा कभी
पूर्वजों के भविष्य में।


© मोहन राणा 2016
नववर्ष 2017 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
Wish you a fulfilling and Joyous New Year 2017.


Wednesday, November 30, 2016

लुबलियाना में कविता पाठ । Poetry Reading in Ljubljana

I spent almost a week  in Slovenia with very talanted and creative poets, Stanka Hrastelj, Ricardo Domeneck and Azita Ghahreman writing in their own language at the moment in Europe.
After translating each other's poetry for almost a week in an intense & a rewarding translation workshop at Škocjan.
A reading of translated poems was given in Hindi, Persian, Portuguese and Slovenian in the Book fair at Tržaška Cesta, Ljubljana, Slovenia on 25th November 2016.

कविता पाठ । Poetry Reading


Published on 17 Jul 2016
The indian poet Mohan Rana (Delhi, 1964) reads some poems and talks about his poetry in this video, recorded in Zaragoza (Spain). Rana visited Spain in March 2016 for a poetry reading in Antígona bookshop (Zaragoza) and in Voces del Extremo poetry festival (Logroño).

Poems translated from Hindi by Lucy Rosenstein and Bernard O'Donoghue. Video by David Francisco.

More info about Mohan Rana in https://en.wikipedia.org/wiki/Mohan_Rana

Video by David Francisco
 

Thursday, October 20, 2016

ग्दांस्क , पोलैंड में कविता । A poem in Gdansk, Poland

ग्दांस्क , पोलैंड में कविता

[पारगमन]

मैं अतीत था फिर भी मैं सबको भूल जाऊँगा
मैं सब सुन लेता हूँ अब, मैं अनहद हो गया हूँ........

The Crossing

I'll forget all, even though I was the past

I hear all now, I have become the Primal Sound...


Przejście

Zapomnę wszystko, choć byłem przeszłością.
Teraz słyszę wszystko, stałem się Pradzwiękiem.
Sięgam wzrokiem daleko, stałem się horyzontem.
Choć oddaliłem się od wszystkiego,
nadal tak bliski aż niewidoczny; teraz jestem jednym w twoim oddechu.
Kukło z gliny, stałem się ziemią.

© Mohan Rana 2016

'Jo Quail with Cappella Gedanensis'

Sunday 23rd October,Gdansk, Poland

featuring poetry of Mohan_Rana, plus tracks from all albums!