सुबह सपनों का अनुवाद करने के लिए होती है
जो अधूरे रह गए थे,
अभी भी घट रहे हैं
पर याद तो नींद में ही आते हैं
© मोहन राणा 2022
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नया संग्रह ' मुखौटे में दो चेहरे 'छापा खाना की तैयारी में।
कविता अनुवाद और विचार यूँ तो शब्दकोश निरंतर नये शब्दों अर्थों से भरता जाता है पर ख़ाली भी धीरे-धीरे होता जाता है। दैनंदिन में समय का अकेलापन...