कविता अनुवाद और विचार
कविता अनुवाद और विचार यूँ तो शब्दकोश निरंतर नये शब्दों अर्थों से भरता जाता है पर ख़ाली भी धीरे-धीरे होता जाता है। दैनंदिन में समय का अकेलापन...
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वापसी एक नीरव जगह तुम बेचारे पेड़ को अकेला छोड़ आईं! जमे हुए विस्तार में जो वृद्ध हो चुके ये पहाड़ लंबे शारदीय उत्सव का उपद्रव मचाते है...
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कि याद रहे दिल्ली में अनायास अविस्मरणीय प्रवास। Last week as I was leaving Delhi ; A poetry reading at Sahitya Akadami Delhi. 8th Sept 202...