Friday, 4 March 2022
Tuesday, 8 February 2022
सुबह सपनों का अनुवाद करने के लिए होती है।
सुबह सपनों का अनुवाद करने के लिए होती है
जो अधूरे रह गए थे,
अभी भी घट रहे हैं
पर याद तो नींद में ही आते हैं
© मोहन राणा 2022
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नया संग्रह ' मुखौटे में दो चेहरे 'छापा खाना की तैयारी में।
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Language of poetry : Mohan Rana, pjesnik na Svački
Rather than mapping human-made political borders or country lines, Rana acts as a cartographer of "nameless, invisible boundaries...
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कविता अनुवाद और विचार यूँ तो शब्दकोश निरंतर नये शब्दों अर्थों से भरता जाता है पर ख़ाली भी धीरे-धीरे होता जाता है। दैनंदिन में समय का अकेलापन...
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